Bharat Mata Ki Jai

Bharat Mata Ki Jai
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी.

Monday, 5 August 2013

" वीर तुम बढे चलो "

वीर तुम बढ़े चलो। धीर तुम बढ़े चलो।
हाथ में ध्वजा रहे
। बाल दल सजा रहे।।


ध्वज कभी झुके नहीं
। दल कभी स्र्के नहीं।

वीर तुम बढ़े चलो। धीर तुम बढ़े चलो।।

सामने पहाड़ हो
। सिंह की दहाड़ हो।
तुम निडर डरो नहीं। तुम निडर डटो वहीं।।

वीर तुम बढ़े चलो
। धीर तुम बढ़े चलो।

प्रात हो कि रात हो। संग हो न साथ हो।।

सूर्य से बढ़े चलो
। चन्द्र से बढ़े चलो।

वीर तुम बढ़े चलो। धीर तुम बढ़े चलो।।

एक ध्वज लिये हुए
। एक प्रण किये हुए।

मातृ भूमि के लिये। पितृ भूमि के लिये।।

वीर तुम बढ़े चलो
। धीर तुम बढ़े चलो।
अन्न भूमि में भरा
। वारि भूमि में भरा।।


यत्न कर निकाल लो रत्न भर निकाल लो
।
वीर तुम बढ़े चलो
। धीर तुम बढ़े चलो।।


                      ---- द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी




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