Bharat Mata Ki Jai

Bharat Mata Ki Jai
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी.

Saturday, 12 January 2013

" उठो सोने वालों "

उठो सोने वालों सबेरा हुआ है।
वतन के फ़क़ीरों का फेरा हुआ है।।

उठो अब निराशा निशा खो रही है
सुनहली-सी पूरब दिशा हो रही है
उषा की किरण जगमगी हो रही है
विहंगों की ध्वनि नींद तम धो रही है
तुम्हें किसलिए मोह घेरा हुआ है
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है।।

उठो बूढ़ों बच्चों वतन दान माँगो
जवानों नई ज़िंदगी ज्ञान माँगो
पड़े किसलिए देश उत्थान माँगो
शहीदों से भारत का अभिमान माँगो
घरों में दिलों में उजाला हुआ है।
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है।

उठो देवियों वक्त खोने न दो तुम
जागो तो उन्हें फिर से सोने न दो तुम
कोई फूट के बीज बोने न दो तुम
कहीं देश अपमान होने न दो तुम
घडी शुभ महूरत का फेरा हुआ है।
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है।

हवा क्रांति की आ रही ले उजाली
बदल जाने वाली है शासन प्रणाली
जागो देख लो मस्त फूलों की डाली
दरख़्तों पे चिड़ियों का फेरा हुआ है।
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है।







Monday, 31 December 2012

आप सभी को नव वर्ष की मंगल कामनाएं

हर जाने वाला साल 
इतिहास बन जाता हैं 
हर आने वाला साल 
वर्तमान में दाखिल हो जाता हैं 
वक्त के आईने में 
जब भी जाने वाले साल को देखा 
तो -लगा 
सबको विरासत में 
मिले है ...कुछ सुख -दुःख 
कुछ यादे कड़वी -मीठी सी 
कुछ दोस्त -कुछ दुश्मन 
और मिला है एक काफिला 
जो संग अपने चलने को साथ 
हो लिया ..अपना बन के 
मन में ही बसेरा कर लिया |

है चाह सभी की 
बादल धुंधले अँधेरे के 
छट जाएँ जीवन से 
नवभोर की उजली किरण -सी 
आशा जग जाए जीवन में ,
आओ रे मेरे साथियों 
मिल कर करे प्रवेश ,
नववर्ष में 
एक बार फिर से देखे नए सिरे से 
अपना बचपन और जवानी 
लिखे रोज एक नयी कहानी 
काहे की ये तनातनी ,
छोडो ये उदासी 
मारो अपने ही अहम को 
आओ नए साल में 
शुभ संकल्पों को लेकर 
हाथ थाम कर एक दूजे का 
साथ चले फिर से मिलजुल कर |


वर्षभर जो कुछ अच्छा या अनचाहा अप्रिय घटित होता है उसका मन पर असर हमेशा बना रहता है। वर्तमान परिदृश्य देख लगता है कि अनुपयुक्त के अनाचारों को उलट कर उसके स्थान पर औचित्य की नीति - निष्ठा पुनः प्रतिस्थापित करने की आवश्कता हैं। मानसून उठते देख जल्दी ही वर्षा होने की परिकल्पना तो हर कोई समझदार कर सकता है, लेकिन किसी तीव्र तूफ़ान के आने का पूर्वानुमान हर किसी को हो जाय, यह संभव नहीं। आज अवांछनीय प्रचलनों के फलस्वरूप उत्पन्न असंतुलन से मानव जाति कही न कहीं त्रस्त दिखाई देती है, इस अन्धकार को चुनौती देने वाला प्रभात उषाकाल में अपने आगमन की सूचना दे रहा हैं। आओ इस नववर्ष के सुप्रभात की बेला का स्वागत कर 'वसुधैव कुटुम्बकम' की अवधारणा को अपने-अपने स्तर पर साकार करने का संकल्प लेकर मनाएं |
आज हमारा देश कई तरह की तकलीफों से गुजर रहा है। हमें देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए मिलजुल कर काम करना होगा | मै आप सभी से यह आग्रह करता हूं कि हर कोई यदि आपस में मिलजुल कर रहे तो हर काम जहां संभव होगा, वहीं आपसी एकता को भी बढ़ावा मिलेगा।
आपके इस भाई कि तरफ से आप सभी को नव वर्ष की मंगल कामनाएं, आप सभी को दुनिया की सारी खुशियाँ मिले ...


                                                                                               -  जय हिन्द जय भारत

Monday, 1 October 2012

भारत माता के सपूत लाल बहादुर शास्त्री को शत् शत् नमन...

पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की मौत का रहस्य हमेशा से भारत की जनता के लिए रहस्य ही रहा है। अब यह रहस्य और गहरा गया है। भारत सरकार सुभाषचंद्र बोस और लालबहादुर शास्त्री जैसे महापुरुषों के जीवन को इतना रहस्यमय क्यों मानती है? आधिकारिक तौर पर शास्त्री जी की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई जबकि उनकी पत्नी श्रीमती ललिता शास्त्री ने यह आरोप लगाया कि उनकी मौत जहर से हुई है... कई लोगों का मानना है कि उनका शरीर नीला पड़ गया था जो विषाक्तता का प्रमाण है... वास्तव में विषाक्तता के संदेह में एक रसियन खानसामा गिरफ्तार भी किया गया था लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया...विदेश मंत्रालय ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत को लेकर मास्को स्थित भारतीय दूतावास के साथ पिछले 47 साल के दौरान हुए पत्र व्यवहार का यह कहते हुए खुलासा करने से इनकार कर दिया है कि इससे देश की संप्रभुता और अखंडता तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।पहले विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उसके पास ताशकंद में 1966 को हुई शास्त्री की मत्यु के संबंध में केवल एक मेडिकल रिपोर्ट को छोड़ कर कोई दस्तावेज नहीं है। यह मेडिकल रिपोर्ट उस डॉक्टर की है जिसने उनकी जांच की थी। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने भारत और पूर्ववर्ती सोवियत संघ के बीच शास्त्री की मौत को लेकर हुए पत्र व्यवहार के बारे में चुप्पी साध ली थी।'s Eye On South Asia के लेखक अनुज धर ने सूचना का अधिकार के अंतर्गत दिए गए अपने आवेदन में प्रधानमन्त्री कार्यालय से शास्त्री जी की मौत के बाद विदेश मंत्रालय और मास्को स्थित भारतीय दूतावास तथा दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच हुए पत्र व्यवहार का ब्यौरा मांगा था.. उन्होंने यह भी कहा था कि अगर कोई पत्र व्यवहार नहीं हुआ है तो इसकी भी जानकारी दी जाए..धर ने दिवंगत प्रधानमंत्री की जांच करने वाले डॉक्टर आर एन चुग की मेडिकल रिपोर्ट भी मांगी थी जो शास्त्री जी के पोते और भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह के अनुसार, सार्वजनिक संपत्ति है...मंत्रालय ने यह नहीं कहा कि कोई पत्र व्यवहार हुआ या नहीं.. उसने जवाब दिया कि जो सूचनाएं मांगी गई हैं उन्हें सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8 (एक) (ए) के तहत जाहिर नहीं किया जा सकता... इस धारा के तहत ऐसी सूचना के खुलासे पर रोक है जिससे देश की संप्रभुता और अखंडता पर तथा विदेश से संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो..मंत्रालय ने इस धारा के तहत छूट मांगने का कारण नहीं बताया जबकि केंद्रीय सूचना आयोग के आदेशों के अनुसार कारण बताना आवश्यक है.. वर्ष 1965 में हुए भारत पाक युद्ध के बाद शास्त्री जी जनवरी 1966 में पूर्ववर्ती सोवियत संघ में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान के साथ एक बैठक के लिए ताशकंद गए थे। संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही घंटे के बाद शास्त्री जी की रहस्यमय परिस्थितियों में मत्यु हो गई थी।        सिंह ने बताया कि डाक्टर की रिपोर्ट सार्वजनिक की जा चुकी है.. मेरे पास इसकी एक प्रति है.. इसमें डाक्टर ने अंत में लिखा है -हो सकता है -इससे ऐसा लगता है कि उनकी मौत का कारण जैसे कुछ शब्दों का इस्तेमाल किया गया है जिसका मतलब दिल का दौरा हो सकता है। प्रधानमंत्री की मौत को आप इस तरह नहीं बता सकते-इसके लिए आपको 100 फीसदी निश्चित होना होगा...धर का कहना है कि विदेश में प्रधानमंत्री की मौत से खासी हलचल हुई होगी और मास्को स्थित भारतीय दूतावास में भी गतिविधियां कम नहीं हुई होंगी.. उन्होंने कहा इस घटना को लेकर कई फोन और टेलीग्राम आए होंगे लेकिन विदेश मंत्रालय इनमें से किसी का भी खुलासा करने को तैयार नहीं है।धर के अनुसार, पहले उन्होंने कहा कि मास्को स्थित भारतीय दूतावास में डा चुग की रिपोर्ट के अलावा कोई दस्तावेज नहीं है..अब वे कहते हैं कि वे फोन कॉल्स और टेलीग्राम का ब्यौरा जाहिर नहीं कर सकते... इसका मतलब यह है कि ये रिकॉर्डस हैं लेकिन पहले कह दिया गया कि रिकार्डस नहीं हैं..


भारत माता के सपूत लाल बहादुर शास्त्री के जन्मदिवस पर शत् शत् नमन...






अमर शहीद सरदार भगतसिंह को शत् शत् नमन









Friday, 14 September 2012







हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा...........



शब्दों को जन्म ही नही दिया
जीवन की आशा दी है
हिंदी तुम ने हर एक भाव को
कोई परिभाषा दी है

जननी हो कर नयी
भाषाओं को रचा है
तुम ने जो भी कह दिया
हर शब्द सच्चा है

तुम माँ हो यही सच है
तुम से दूर क्यों रहा जाए
तुम मे ही हर दिन का काज
किया जाए जो किया जाए
कहा जाए जो कहा जाए
तुम से दूर क्यों रहा जाए


गंगाजल सी निर्मल हो
ममता जैसी सरल हो
तुम सभी देवताओं की
अर्चनाओं का फल हो

तुम मे बालक की हथेली कभी
कभी आकाश सा फैलाव है
तुम उसे साँचा दे देती हो
मेरे पास जो भी भाव है

अब दूरीया सब मिटानी हैं
तुम्हारे पास मैं सदा रहूँगा
तुम जो कहोगी मैं लिखूँगा
तुम जो लिखोगी मैं कहूँगा
तुम्हारे पास मैं सदा रहूँगा.......